Thursday 18 June 2015

कलयुग की इस दुनिया में इंसान खरीदे जाते है

कलयुग की इस दुनिया में इंसान खरीदे जाते है,
बाज़ारो में संगमरमर के भगवान ख़रीदे जाते है।

कहीं रहने को नहीं चॉपर-पाटा और कहीं खेत और खलियान खरीदे जाते है,
कहीं नहीं मिलता फल, सब्जी और मेवा और कहीं वाहन और उद्यान ख़रीदे जाते है।

यहाँ रोते बिलखते बेटे, बहु, माँ, बीवी और बहना,
कोई न कोई अभाव में ना कर पाते अपनों की सेवा।

कलयुग की इस दुनिया में इंसान खरीदे जाते है,
बाज़ारो में संगमरमर के भगवान ख़रीदे जाते है।

- कविता का उद्देश्य समाज में व्याप्त विषमताओं पर कटाक्ष करना है।
- मूल कविता श्री मती कविता जी मोदी द्वारा लिखित

Kalyug ki iss duniya me insaan khride jate hai,
Bazaro me sangmarmar ke bhagwan kharide jate hai.

kahi rahne ko nahi chopar-patta aur kahi khet or khaliyaan khride jate hai,
Kanhi nahi milta fal, sabji or mewa aur kahi wahan or udhyaan kharide jate hai,

Yanha rote bilakhte bete, bahu, maa, biwi aur bahnaa,
Koi na koi abhav me na kar pate apano ki seva.

Kalyug ki iss duniya me insaan khride jate hai,
Bazaro me sangmarmar ke bhagwan kharide jate hai.

No comments:

Post a Comment